Chalak Mistri Ki Kahani

Chalak Mistri Ki Kahani

चालाक मिस्त्री की हिंदी कहानी

चालाक मिस्त्री की कहानी- पालमपुर गांव में एक कल्लू नाम का मिस्त्री रहता था एक दिन वह उदास होकर अपने घर गया तो उसकी पत्नी ने उससे पूछा क्या हुआ जी आज तुम बड़े उदास लग रहे हो इस बात पर कल्लू मिस्त्री ने जवाब दिया हां कुसुम अब मैं मिस्त्री गिरी से थक गया हूं चार पीढ़ी से हम लोग मिस्त्री का काम कर रहे हैं दूसरों के लिए बड़े-बड़े बंगले बनाएं परंतु आज तक अपने लिए एक झोपड़े से ज्यादा कुछ नहीं बना सके कल्लू की पत्नी बोली निराश ना हो जी एक दिन आप भी अपने लिए बांग्ला बनाएंगे , कल्लू ने कहा कैसे बनाएंगे मिस्त्री के काम में इतना ही पैसा मिलता है कि दो वक्त की सूखी रोटी खा सके कल्लू की पत्नी बोली अपने काम पर भरोसा रखें कोई न कोई रास्ता जरूर मिलेगा .तभी उसी वक्त गांव का एक आदमी जिसका नाम बोला है वाह कल्लू मिस्त्री को जोर-जोर से आवाज देता है और कहता है कल्लू मिस्त्री चलो तुम्हें गांव के जमींदार ने बुलाया है भोला की बात सुनकर कल्लू मिस्त्री तुरंत जमीदार से मिलने के लिए उसके घर जाता है जब वह जमीदार के घर पहुंचता है तो जमीदार उससे कहता है आओ आओ कल्लू मिस्त्री हमें तुमसे एक बंगला बनवाना है ,इस बात को सुनकर कल्लू मिस्त्री जमीदार से पूछता है अरे हमने अभी कुछ समय पहले ही तो आपके लिए एक बड़ा सा बंगला बनाया था और उससे पहले भी आपके लिए 8 – 10 बंगले बना चुका हूं जमीदार कहता है हां किंतु एक और बंगला बनवाना है यह लो पैसे आज से ही काम पर लग जाओ और सुनाओ इस बंगले को भी सभी बंगलो की तरह मजबूत बनाना ताकि यह अगले 50 साल तक चल सके.

जमीदार की बात सुनकर कल्लू मिस्त्री उसे दिन से एक नया बंगला बनाना शुरू कर देता है बांग्ला बनाते बनाते वह पैसों की पोटली को देखकर सोचता है क्यों ना मैं इसी पैसों से अपने लिए भी बांग्ला बना लूं जमीदार के बाकी बंगले भी तो इन्हीं पैसों से बनाया हूं जो 50 साल तक खड़े रहेंगे अगर यह बंगला 2 साल में भी गिर जाता है तो जमीदार साहब का क्या नुकसान होगा उनके पास तो बहुत सारे बंगले हैं मैं इस बंगले को सस्ते में बना देता हूं और बाकी के पैसे मैं रख लेता हूं उन पैसों से दूसरे गांव में जाकर एक बड़ा सा बंगला अपने लिए बना लूंगा अगर 2 साल में या बंगला गिर भी जाता है तो क्या तब तक मैं इस गांव से बहुत दूर जा चुका हूंगा कुसुम ठीक कहती थी कि अपने काम पर भरोसा रखो वह रास्ता खुद ब खुद तुम्हें दिखाएगा लगता है कि वह यही रास्ता है इस बंगले में सस्ती चीजें लगाकर सस्ते मैं बना दूंगा और बाकी पैसे बचा लूंगा.

कल्लू मिस्त्री यही सोचकर बाजार से हूबहू असली दिखने वाली चीजें नकली खरीद कर ले आया उसके बाद वह दिन रात मेहनत करके बंगले को बनाने में जुट गया जमीदार को शक ना हो इसलिए कल्लू मिस्त्री ने बंगले में बहुत ही खूबसूरत नकली चीजें लगवाई ,कल्लू मिस्त्री की कड़ी मेहनत के बाद जमीदार का बांग्ला बनकर तैयार हो गया इस बंगले को जमीदार देखकर बोला वाह वाह कल्लू तुम्हारी तो हाथों में जादू है इतनी जल्दी तुमने यह बंगला बना दिया इसे देखकर तो यह लगता है किया बंगला 50 साल नहीं 100 साल तक चलेगा जमीदार किया बातें सुनकर कल्लू मन ही मन सोचता है 100 साल जमीदार साहब 100 साल तो मेरा बंगला चलेगा जो मैं पड़ोस के गांव मैं बनाऊंगा यह तो 2 साल में ही गिर जाएगा इस बंगले में मैंने बहुत पैसे खाए हैं .

Chalak Mistri Ki Kahani
जमीदार कहता है कल्लू मिस्त्री आज तक मैंने तुम्हें सिर्फ मजदूरी ही दी है हमारे पूरे परिवार की इच्छा थी कि हम तुम्हें कुछ इनाम दें इसलिए हमने या बंगला बनवाया है यह लो चाबी हम तुम्हें यह बंगला इनाम में दे रहे हैं यह समझ लो कि यह बंगला हमने तुम्हें इनाम में देने के लिए ही बनवाया है मगर तुमने हमें पहले क्यों नहीं बताया जमीदार बोला हम तुम्हें सरप्राइस देना चाहते थे अब कल्लू के समझ में नहीं आता है कि वह क्या करें इतना बड़ा बंगला वाह लेने से मना भी नहीं कर सकता यदि वह मना करेगा तो उसे उसका कारण बताना पड़ेगा लेकिन वह यह बता नहीं सकता था कि वह इतना कच्चा बंगला बनाया है कि वह 2 साल में ही गिर जाएगा आखिरकार उसने उस बंगले की चाबी ले ली और अपने बीवी के साथ आकर उस बंगले में रहने लगा कल्लू की बीवी इतना बड़ा बंगला पाकर फूले नहीं समा रहे लेकिन कल्लू मिस्त्री दुखी था उसके मन में चिंता थी उसने क्यों ऐसा बंगला बनाया कि वह 2 साल में ही गिर जाए और वाह यह सोचता है भगवान यह क्या हो गया अब मैं बहुत बुरी तरह फस गया हूं अगर मैं उन पैसों से पड़ोस के गांव में बड़ा सा बंगला बनाता हूं तो जमीदार को जवाब देना पड़ेगा उसने मुझे बंगला दिया फिर भी मैं एक नया बंगला बनाने का खर्च क्यों उठा रहा हूं ना मैं अपने चुराए हुए पैसों से पड़ोस के गांव में बंगला बना सकता हूं और ना ही इस बंगले में मैं 2 साल से ज्यादा रह सकता हूं और यह सब सोचकर कल्लू मिस्त्री किसी तरह उस बंगले में अपनी जिंदगी बिता रहा था.

कल्लू मिस्त्री की बीवी बहुत खुश थी जमीदार ने ना ही केवल बंगला बल्कि कल्लू मिस्त्री की बीवी के लिए ढेर सारे गहने और कल्लू मिस्त्री के लिए नए कपड़े भी बनवाए थे ताकि वह बंगले में अच्छी तरह से रह सके लेकिन कल्लू मिस्त्री दिन का दिन दुखी होता जा रहा था इसी तरह धीरे-धीरे करके 2 साल बीत गए अब वह दिन आ गया था जब उसके मुताबिक वह बंगला एकदम से गिर जाएगा उससे एक दिन पहले कल्लू मिस्त्री को पूरी रात नींद नहीं आई वाह बिस्तर पर लेटा लेटा यह सोचता रहा कि कल यह बंगला गिर जाएगा अगर मैं इसे बचाने के लिए मरम्मत भी करवाता हूं तो भी जमीदार को जवाब देना होगा कि 50 साल तक चलने वाला बंगला 2 साल में कैसे गिर जाएगा यह बात तुमको कैसे पता और मेरी बेईमानी पकड़ी जाएगी अब जान बचाने का एक ही रास्ता है कि मैं बीवी को लेकर उसके मायके चला जाऊं लेकिन मैं अपने साथ गहने और कीमती सामान भी नहीं ले जा सकता क्योंकि जमीदार को शक हो जाएगा कि मैं यह सब चीजें लेकर गया इसलिए मुझको पता था कि यह बंगला गिर जाएगा मजबूरी में अब मुझे सब कुछ यही छोड़ कर जाना पड़ेगा.

दूसरे दिन ही कर लूं मिस्त्री सब कुछ बंगले में ही छोड़कर अपनी बीवी को लेकर उसके मायके चला गया उसी रात वाह बंगला गिर गया दूसरे दिन जब वाह वापस आया तो बंगले के सामने सर पटक पटक कर रोने का नाटक करने लगा और कहने लगा कि मेरे सारे गहने और पैसे इसी बंगले में दफन हो गए जमीदार के सामने क्या कह कर उसने अपनी जान बचा ली कि शायद हम मिस्त्री लोगों के जीवन में एक झोपड़ा ही लिखा है इसीलिए या बंगला गिर गया नहीं तो आज तक कोई भी बंगला आपका नहीं गिरा जमीदार भी उसकी बात मान गया और कल्लू मिस्त्री अपनी बीवी के साथ उसी झोपड़े में आकर रहने लगा अपना वही पुराना मिस्त्री का काम करने लगा लेकिन उसको एक बात समझ में आ गई थी कि किसी भी इंसान को अपने काम के साथ बेईमानी नहीं करनी चाहिए अगर मैंने भी अपने काम के साथ ईमानदारी की होती तो आज मैं भी एक बड़े बंगले में रह रहा होता.

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