Emandari Ka Inaam Hindi Story

Emandari Ka Inaam Hindi Story

शीर्षक — ईमानदारी का इनाम

 

रामू एक पेंट का काम करता था,उसके गांव का नाम का नाम महराजपुर था, घर में पत्नी एक बेटा और एक बेटी थी, रामू का बड़ा ही अच्छा और ईमानदारी का रहता था, वह छोटा-मोटा काम का पैसा भी नहीं लेता था, जब की गांव के सारे पेंट के काम करने वाले ऐसा नहीं करते थी, वे लोग छोटे- मोटे काम के भी पैसा ले लेते। पैसा के आभाव में रामू परेशान हो गया की ,अब क्या करे कि पैसा ज्यादा आने लगे, क्यों कि घर का खर्च बढ़ता ही जा रहा है, रामू के बेटे का नाम राजू था, फिर उसने सोचा कि क्यों ना कुछ काम राजू को भी करवा दू, जिस से ज्यादा पैसा आये, फिर वह सोचा कि पेंट का काम हम तो कर ही रहे है,उसको कोई दूसरा काम करवा देता हूँ, फिर उसने अपने बेटे को बुलाया और बोलै कि अब तुम को मिठाई कि दुकान करना है, राजू को मिठाई बानने का काफी शौक था, वह दुकान पर काफी तरह – तरह के मिठाई बनाता था।

राजू कि दुकान पर काफी लोग आते , बगल ही रामू भी पेंट का का दुकान भी चालत था , जब लोग रामू के पास- आते तो राजू कि मिठाई और समोसा को देखकर रह न पते फिर बोलते फिर राजू भाई समोसा खिलाओ , इस से खूब पैसा भी आ जाता था, और जो लोग राजू कि दुकान पर आते तो बगल रामू कि दुकान पर भी आ जाते कि हमको कुछ पेंट का काम भी है, कुछ लोग पेंट न कराते, धीरे-२ लोगो के घर का भी ठेका लेने लगे रामू , लोगो के घर घरो में पेंट का काम काफी अच्छी तरह से करता था रामू, जिस से लोग उसको ही बुलाते।

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एक बार राजू कि दुकान पर सेठ धनीराम आये , फिर उन्होने राजू से कहा कि राजू बेटा हमको मिठाई और समोसे दोनों खिलाओ ,फिर सेठ धनीराम को राजू के दुकान के समोसे और मिठाई दोनों अच्छे लगे, फिर सेठ जी ने कुछ मिठाई और समोसे घर के लिए भी ख़रीदे , जब घर लेकर आये तो घर के लोगो के मिठाई और समोसे दोनों कि बहुत तारीफ किया , फिर अक्सर सेठ जी राजू के दुकान पर आते
, जब राजू सेठ जी को देखता तो उनके घर ले जाने के लिए अच्छे समोसे निकल देता ,सेठ जी को खिलता भी, सेठ जी भी काफी खुश थी, राजू के दुकान का सामान देख कर कि इतना अच्छा से चीजों को रखता था, और बड़े प्यार से बात करता है, फिर एक बार सेठ जी के घर वालो को कही घूमने जाना था, नदी के रास्ते से जाना था, नाव पेंट नहीं थी, फिर सेठ जो ने रामू को घर पर बुलाया कि इस नाव के पेंट के कितने रुपये लोगो तो ,रामू के कहा की सेठ जी इसके १५०० रुपये हुए फिर भी जो आप समझे वो दे दीजेगा , रामू को सेठ जी ने नाव दिखाई।

फिर अगले दिन रामू पेंट का सामान लेकर नाव पेंट करने लगा , बहुत अच्छी तरह से पेंट किया ,नाव में एक छेद था, फिर उसमे एक जगह छेद था, फिर उसने लकड़ी के टुकड़े से पहले छेद को भरा फिर उसको पेंट किया ,जब सेठ जी ने देखा कि नाव पेंट हो गयी तो वे बहुत खुश हुए , फिर बोले कि रामू तुम बहुत अच्छा काम करते हो, उसी तरह तुम्हारा बेटा भी बहुत अच्छा काम करता है, फिर सेठ जी ने रामू से कहा कि कल आकर पैसा ले जाना , फिर रामू के ठीक है सेठ जी,इधर नाव के पेंट होने पर सेठ जी का परिवार नाव पर बैठ कर बहार घूमने चला जाता है, फिर जब सेठ जी का नौकर आता है, घर के सारे लोगो को न देखकर सेठ जी से पूछता है, तब सेठ जी नौकर को सब बात बताते है, फिर नौकर बोलता है कि सेठ जी नाव में छेद था , जब यह बात नौकर के द्वारा सुनता है, तो सेठ घबरा जाता है,

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फिर उसी समय सेठ जी का परिवार बाहर से घूम कर आ जाता है, सेठ जी परिवार के सारे लोग को देखकर खुश हो जाते है, फिर वो उस नाव के पास जातेहै, नौकर के साथ, फिर वहां देखते है कि, कि रामू ने छेद के जगह पे लकड़ी के टुकड़े को लगा दिया ,फिर उसको पेंट किया , इधर अगले दिन सेठ जी के कहने पर रामू आता है , पैसे लेने सेठ जी उसको पैसे देते है, फिर रामू पैसा गिनता है,तो पैसा ६००० रूपये होता है,फिर सेठ जी से कहता है, कि सेठ जी आप ने हमे ज्यादा पैसे दिए है, आप कि- हमारी बात ६००० पर तय हुई थी, सेठ जी कहते है, कि तुम ने अगर नाव के छेद सही नहीं किये होते तो ,आज हमारे परिवार का पता नहीं क्या होता, ये बाकी के पैसे तुम्हारी ईमानदारी के है।

 

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