Lalchi Dudh Wala Hindi Kahani

शीर्षक — लालची दूधवाला

कन्हैया और राजू एक छोटे से गांव शिखर पुर में रहते थे, वे दोनों गाय रखे थे उसी से उन दोनों का जीवन -यापन चलता था, कन्हैया के आलस्यपन नहीं था, जबकि राजू बड़े ही आलसी स्वाभाव का व्यकित था, कन्हैया सुबह उठकर सबसे पहले गाय को दोनों हाथो से पैर छूता था, उसके बाद हरी घास और कुछ खाद्य -पदार्थ मिलाकर चारा के रूप में गाय को खिलाता था, उसके बाद तैयार होकर गाय को दुहकर फिर दूध बेचने जाता था, और पानी नहीं मिलता था, जिससे उसका दूध लेने वालो की लाइन लग जाती थी, और लोग उसके दूध के काफी तारीफ करते थे, फिर दूध बेचकर वह घर आकर भोजन करके तोड़ी देर बाद फिर गाय की सेवा में लग जाता था,

               जबकि इधर राजू रोज सूर्योदय के बाद उठता था, फिर गाय के चिल्लाने पर वह सुखी घास गाय को खिलाता था, और बोलता था, दूध तो देती नहीं हो, जब देखो खाने को लगी रहती है, फिर फिर गाय को दुहकर वह उसमे पानी मिलकर बेचने जाता था, फिर लोग कहते थे, की राजू आज कितना पानी मिलाया है, कुछ दिन से तुम पानी बहुत मिला रहे हो दूध में ,अगर नहीं सुधरोगे तो हम तुम्हारा दूध नहीं लगे, फिर कुछ लोग उसका दूध लेना बंद कर देते है, और कन्हैया से लेने लगते है, फिर एक दिन उसका दूध नहीं बिक पाटा है, फिर वह घर आ जाता है, उसकी पत्नी पूछती है की आज कितनी कमाई हुई ,इस बात पर राजू बोलता है, आज तो कुछ नहीं बिका, सब बर्बाद होगया

              फिर राजू की पत्नी उसको कहती है क्यों न हम आज  रात में ही जाकर कन्हैया की गाय को दुह ले , फिर जैसे ही सुबह होने वाली होगी , हम लोग चुपके से बहार भाग आएंगे , फिर तुम बो दूध ले जाकर बाजार में बेंच देना, फिर हमारा काफी फायदा आ जायेगा, और हम खूब पैसा कमा लगे, फिर राजू ने कहा तुमने सही कहा, फिर वे दोनों रात को ही कन्हैया के यहाँ गाय को दुहकर सुबह होने से पहले अपने घर आ जाते है, फिर राजू गाय का दूध लेकर बाजार में बेचने चला जाता है, इधर कन्हैया देखता है की उसकी गाय दूध नहीं दे रही है , फिर वह सोचता है, की लगता है की मेरी गाय बीमार है

वह परेशान हो जाता है, फिर उस दिन बाजार नहीं जाता है, इधर कन्हैया के न आने पर राजू बाजार में सारा दूध बेच देता है, और उस दिन लोग राजू के दूध के बहुत तारीफ करते है, फिर वह घर आकर सारा पैसा अपनी पत्नी को देता है, और फिर कहता है की आज बहुत कमाई हुई है, फिर दोनों खूब खुश हो जाते है,।

    अगले दिन फिर वे दोनों योजना बनाते है की आज भी उसी तरह से काम करना है, रात को ही वे लोग जाकर दुह कर सुबह होने से पहले भाग आते है, फिर राजू बाजार में बेचकर पैसा पैसे अपनी पत्नी को देता है, इधर फिर कन्हैया परेशान हो जाता है,की हमारी गाय दूध क्यों नहीं दे रही है, फिर अगले दिन जैसे वह रात हो दुह रहा होता है, कन्हैया की पत्नी देख लेती है, और जब सुबह कन्हैया दुह ने जाता है, फिर गाय दूध नहीं देती है, फिर वह अपनी पत्नी से कहता है की लगता है की गाय बीमार हो गयी है, हमे किसी डॉक्टर को बुलाना पड़ेगा, फिर उसकी पत्नी उसे रात की सारी बात बताती है,

                                        फिर वे दोनों योजना बनाते है की आज रात को जब राजू और उसकी पत्नी आएगी तो हम गाय की जगह साड बाँध देंगे, फिर उसको सबक मिल जायेगा , फिर जैसे ही राजू और उसकी पत्नी कन्हैया के यहाँ आते है, कन्हैया और उसकी पत्नी छुप कर सारा हाल देखते है, फिर जैसे ही राजू साड हो गाय समझ कर रात में दुहने जा रहा होता है , कि साड उसको बड़े तेजी से अपनी शींग से मारता है, फिर उसका पैर टूट जाता है, फिर वह तेज से चिल्लाने लगता है, फिर कन्हैया और उसकी पत्नी और गांव के लोग वहा आ कटे जाते है, सब राजू को मरहम-पट्टी करवाते है, और समझते है, कि वह आलस्यं छोड़कर काम करे ,और कन्हैया कि तरह पैसा kamay।

                      इस कहानी का यह आशय है कि हमे आलस्यपन छोड़कर अपना काम करना चाहिए और किसी के अच्छे काम को देखकर उसकी प्रति विश्वासघात नहीं करना चाहिए।

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