Ma Ka Jadui Bangla – Hindi moral Story

Ma Ka Jadui Bangla - Hindi moral Story

शीर्षक- माँ का जादुई बगंला

राजेश नाम का व्यकित आला पुर गांव में रहता था, वह बहुत ही गरीब आदमी था, उसके घर में उसकी पत्नी ,और एक बेटा था,राजेश जंगल से लकड़ी काट कर बाजार लाता था, वहां पर ऐसे बेच ता था,वह सायकिल से लादकर लकड़ी लाता था, दुकान-२ घर -२ बेचता था,एक बार एक सेठ जी को लकड़ी चाहिए था,उसने राजेश से कहा की भाई लकड़ी के कितने सिक्के हुए ,तब राजेश ने कहा की ५ सिक्के सेठ जी ,तब सेठ जी ने कहा की ३ सिक्के में पूरी लकड़ी दे दो तब ले लगा,तब राजेश ने सेठ जी को ३ सिक्के में पूरा लकड़ी दे दिया, फिर राजेश ने किराना की दुकान के पास गया, और बोला दुकानदार से भाई २ सिक्के के चावल दे दो और १ सिक्के के दाल ,फिर वह से लेकर घर आया, फिर उसकी पत्नी ने दाल चावक की तहरी बनाई फिर सब लोगो ने खाया , यही राजेश का रोज का काम था,।

फिर अगले दिन यही उसका काम था, एक बार जैसे ही राजेश घर से निकला , कि बहुत तेज से बारिश हो गयी, तब भी राजेश जंगल गया,और वहां से लकड़ी लाया। और फिर वह बारिश में लकड़ी लादकर सायकिल पर रख कर बाजार में बेचने गया। फिर वहां पर कोई लकड़ी नहीं बिकी , वह निराश होकर घर आ गया, घर में आकर सारी बात अपने लड़के और पत्नी से बताया , फिर उस रात घर के सभी लोग बिना कुछ खाये-पीये सो गए। फिर अगले दिन कोई ग्राहक नहीं मिला, फिर वह घर आ गया। फिर अगले दिन एक औरत मिली ,उसने ५ सिक्के दिए ,राजेश को फिर राजेश ने सारी लकड़ी औरत को दे दिए , फिर राजेश ने उसमे से ३ सिक्के के चावल और १ सिक्के के दाल और १ सिक्के के सेब ख़रीदा,।

Ma Ka Jadui Bangla - Hindi moral Story

जैसे ही वह घ र आ रहा था, कि रस्ते में एक बांग्ला पड़ा , बांग्ला से एक छोटे से बच्चे कि रोने कि आवाज आयी। फिर राजेश ने सोचा क्यों न बंगले के अंदर चला जाए , तब राजेश ने बंगले के अंदर गया जैसे ही गया तो बंगले के अंदर के एक बच्चा रो रहा था, राजेश ने बच्चे से पूछा ,बीटा क्यों रो रहे हो, तो बच्चे ने कहा कि मुझे बहुत तेज से भूख लगी है, तब राजेश ने बचे को सेब दिया बच्चा खा कर खुश हो गया , फिर बच्चे ने राजेश से कहा कि और कुछ है आप के पास , मेरी माँ को ३ दिन हो गया घर पर नहीं आयी, हम घर पर अकेले रहते है ,
फिर राजेश ने फर के रसोई में गया ,वहां पर दाल चावल बनाया , फिर बना के बच्चे को खिलाया , बच्चा खुश हो गया ,फिर बच्चे की माँ की आत्मा आयी वहां पर राजेश को धन्यबाद कहा ,फिर उसने बताया की ये मेरा लड़का गोलू है। मेरे और मेरे पति एक दुर्घटना में मर गए ,३ दिन हो गया , तब से मेरा गोलू घर में अकेला रहता है, आप से एक निवेदन है की इसे आप अपने आप रखे ,फिर राजेश ने कहा की बहिन जी आप चिंता न करे, राजेश को हम अपने पास रखे गे , हम इसको अपने धार ले जायेगे ,फिर गोलू की माँ बोली ,आप मेरे घर में रहिये ,यहाँ पर कोई खाने-पीने की कमी नहीं होगी ,हम यहाँ पर पूरा खाने का सामान भर देंगे।

फिर वह घर गया, घर में सारी बात अपनी पत्नी और बच्चे को बताई ,फिर सब लोग आकर गोलू के घर में रहने लगे , राजेश की पत्नी खाना बनाती थी, और सब लोग एक साथ बैठ कर खाना कहते थे , और फिर राजेश लड़की का काम छोड़कर  किराने  का दुकान खोल दिया ,राजेश को बेटा और गोलू साथ-२ रहते थे ,साथ ही स्कूल जाते थे , गोलू का घर काफी बड़ा था,

इस कहानी से यह अभिप्राय है की अगर हम किसी की मदद करेंगे तो भगवान हमारी मदद करेंगे , इसलिए हमे दूसरे की मदद करनी चाहिए।

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