Mari Kimat Hindi Moral Story

Mari Kimat Hindi Moral Story

शीर्षक- मेरी कीमत हिंदी कहानी

रमेश नाम का व्यकित आलापुर गांव में रहता था, वह बहुत ही गरीब था, जिसके वजह से वह बहुत परेशान रहता था, रमेश सेठ कुबेर जी के यहाँ नौकरी करता था, सेठ कुबेर जी उसको काम पैसे करते थे, सेठ जी बहुत बड़े कास्तकार थे, उनके पास सोना ,चांदी ,हीरा , का दुकान था, साथ ही साथ उनके यहाँ खाने -पीने के चीजों का दुकान था, रमेश काम बहुत ईमानदारी से करता था, लेकिन सेठ उसकी बात को नहीं मानता
जब भी वेतन रमेश वेतन बढ़ाने का नाम ले वह गुस्सा जाता था, सेठ जी बोलते थे,की तुम काम ही क्या करते हो, तुम्हारी कीमत ही क्या है,
जितनी कीमत है,उतना बेतन पते हो, फिर बोल ते की जाओ जाकर कुछ काम करो, जब भी आते हो तो यही फरियाद लेकर आते हो की मालिक से आज बेतन बढ़वाना है, पहले कुछ काम कर के दिखाओ तो जाने , न तो ज्वैलरी का काम जानते हो, न की कुछ खाने -पीने की दुकान में कुछ सामान बनाना जानते हो, कुछ भी नहीं जानते हो, ऐसी वजह से जब काम जान ने लगो गे तो तुम्हारी कीमत कीमत बाद जाएगी ,तुम चिंता न करो ,यही बात सेठ जी उससे हर समय कहते, यह बात कहते हुए कई साल हो गए, रमेश परेशान हो गया, वह सोच की मेरी क्या कीमत है,इससे कैसे पता करू,।

फिर वह रास्ते से जा रहा था, कुछ दूर जाने पर उसे एक बरगद के पेड़ के पास एक बाबा जी मिले, बाबा जी मौन साधना में थे,,फिर रमेश बाबा जी के पास बैठ गया है, जब बाबा जी मौन साधना से जागे ,फिर बाबा जी ने रमेश से पूछा के क्या हुआ बेटा, क्यों इतना परेशान हो, रमेश ने बाबा जी से कहा की बाबा जी , आप मेरी कीमत क्या है, आप मुझे बताओ,हम बहुत परेशान है, एक सेठ जी के यहाँ नौकरी करता हु ,वो हमको बहुत काम बेतन देते है, जब बढ़ाने की बात करता हु, तो सेठ जी कहते है की तुम्हारी कीमत ही क्या है, जो ज्यादा पैसे दू, जितनी कीमत है उतना पैसा देता हु,फिर उसकी बात सुनकर बाबा जी हसने लगे, फिर बोले बेटा बस इतनी ही बात है, इसलिए परेशान हो, चिंता न करो, फ़ी रमेश ने कहा की आप ही कुछ उपाय बताये बाबा जी।

फिर बाबा जी ने उसे एक प्रकार का टुकड़ा बोले किम ऐसे केकर अब तुम बाजार जाओ , वह पर लगभग सारी दुकानों पर जाना की इससे बदले में आप हमको क्या दे सकते हो, मगर ध्यान रहे इस चीज को कही बेचना नहीं ,फिर जब सब जगह पता कर लेना फिर उसको मेरे पास लेकर आना ,फिर हम तुमको कुछ समझाए गे की क्या कीमत है तुम्हारी,बाबा जी की बात सुनकर वह सोचा की अब हमारी कीमत पता चलेगी की आखिर क्या है।
Mari Kimat Hindi Moral Story
फिर वह टुकड़ा लेकर पहले आम वाले के पास गया, फिर उसने कहा की भाई इस टुकड़े के बदले आप हमको कितने आम डोज, फिर आम वाले ने कहा की भाई हम आप को १० आम देंगे, फिर उसने आम नहीं लिया आगे बड़ा फिर आलू वाला आया ,आलू वाले ने कह की हम आप को २ किलो आलू देंगे,इसके बदले, फ़ी वह एक कबाड़ी वाले के पास गया , कबाड़ी वाले ने कहा की हम इस के बदले १०० रुपये देंगे , फिर वह शीशा वाले के पास गया तो उसने कहा की हम इस से के बदले ५ शीशा देंगे फिर भी उसने नहीं दिया ,फिर उसने उसे लेकर सोना वाले के पास गया उसने कहा की इससे हम ५० लाख में लगे, फिर रमेश लेकर जा रहा था, फिर उसने कहा की रुको ७० लाख देंगे फिर बोलै १ करोड़ , फिर भी वह लेकर आ रहा था, तो सामने एक हीरा की दुकान थी, फिर वह उसे लेकर अंदर गया फिर उसने उस को दिखाया तो दुकानदार ने कहा की २ करोड़ फिर बोला नहीं ५ करोड़ देंगे तब भी रमेश ने नहीं दिया , रमेश ने हीरे के दुकानदार से सारी बात बताई की कौन दुकानदार इसके बदले क्या दे रहा था।
फिर उसने दुकान दर से पूछा की यह क्या है , तो उसने कहा की इसकी कीमत बहुत अधिक है,इससे तुम कुछ भी खरीद सकते हो ,यह रूबी है , यह बहुत महगा बिकेगा भाई साहब ,फिर वह उस टुकड़े को लेकर बाबा जी के पास आया ,उसने सारी बाते बाबा जी से बताया ,फिर बाबा जी पूछा हम तो आप से अपनी कीमत पूछ रहे थे, आप हमको यह क्या पकड़ा दिए थे, बाबा जी ने कहा ऐसे ही तुम्हारी कीमत है, जिस के पास जैसे जाओगे ,जो तुम्हारे काम को सही से पहचान लेगा ,वह उतना बड़ा देगा , जो काम पहचाने गए वह काम लगाए गा।
सब के अंदर ऐसे ही खूबी होती है।

जैसे इस टुकड़े को अलग -२ लोगो ने अलग-२ दाम बताया, वैसे ही तुम्हारी कीमत भी अलग-२ लोग अलग-२ दाम लगाए गे, जिसको तुम्हारे अंदर खूबी नज़र आएगी वह उतना ज्यादा कीमत लगा देगा, जिसको काम नज़र आएगी वह उतना कम कीमत लगाए गा, इसलिए अपने आप को पहचानो की तुम, क्या हो ,। बाबा जी की बात सुनकर वह खुश होने लगा फिर उस से अच्छे बेतन वाली नौकरी मिल गयी।

 

 

Be the first to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published.


*