Mistri RamDev ki kahani

Mistri RamDev ki kahani – Hindi kahani

एक बार की बात है ,एक गांव जिसका नाम राजापुर था ,वहां पर एक मिस्त्री रामदेव था,जो की बहुत ईमानदारी से अपने ठेकेदार राजकुमार के यहाँ काम करता था , ठेकेदार राजकुमार का काम घर बनवाना था,राजकुमार बड़े -२ लोगो के घर बनवाने का काम करता था,रामदेव ठेकेदार राजकुमार के यहाँ जितने भी कारीगर थे उसमे सबसे कुशल कारीगर थ। साथ ही साथ रामदेव सत्यनिष्ठ कारीगर भी था,ठेकेदार राजकुमार रामदेव को सबसे ज्यादा बेतन देता था ,और उसकी सबसे ज्यादा प्रशंशा करता था।

सारे कारीगर ये जानते थे की राम देव को राजकुमार मालिक हम सबसे ज्यादा बेतन देता है ,और उनकी काफी प्रशंशा करते है , ये सारी बाते बाकी कारीगरों को अच्छी नहीं लगती थी। एक बार ठेकेदार राजकुमार ने रामदेव से कहा की तुम सब काम बड़े अच्छे तरह से करते हो , इसलिए हम तुम्हारे कार्य से खुश होकर ये वडा करते है की जब तम बृद्धावस्था में पहुंचोगे तो हम तुमको एक घर दान में देंगे। यह बात सुनकर रामदेव खुश हो गया और घर आकर सारी बात पत्नी जी को बताया की जब हम बृद्धावस्था में पहुंच जायेगे तो मालिक ठेकेदार राजकुमार हमको एक घर दान में देंगे। रामदेव की पत्नी का नाम कलावती था, जो की घर के सारे काम करती थी, और बाहर भी तोडा-मोड़ा काम करने चली जाती थी। धीरे धीरे समय बीत जाने पर बृद्धावस्था आ गयी। फिर कलावती बार-२ रामदेव को यही बात बोलने लगी की अब आप की उम्र काम करने की नहीं रह गयी है ,और आप ही बता रहे थे की मालिक ने आप को बृद्धास्था के समय की घर दान में देंगे , लेकिन रावदेव को यह बात कहने में डर लग रहा था, की मालिक राजकुमार कुछ गलत ना समझे और हमको लालची बोले।

कुछ दिन बाद रामदेव राजकुमार के पास गया और बोला मालिक अब हम काम पे नहीं आ पाएंगे। तो राजकुमार ने कहा ठीक है फिर रामदेव ने घर के लिए कहा तो राजकुमार ने कहा की अभी मेरा एक काम और कर दो फिर हम तुमको घर दे देंगे। फिर राजकुमार ने रामदेव को एक ऐसे स्थान पर लगे गया जहा काफी जमीन थी , लकिन वहाँ पर मकान नहीं बने थीफिर राजकुमार ने रामदेव को ऐसे ही एक स्थान पर ले गया और बोला यहाँ पर एक घर तुमको बनाना है फिर हम तुमको एक घर देंगे ,
रामदेव लालच में आकर जल्दी जल्दी घर बनाने लगा और काम जल्दी से जल्दी करने लगा। उस घर बनाने में दिमाक उस तरह से नहीं लगा रहा था, जितना की सब घर बनाने में। फिर आनन् – फानन में घर उलटा सीधा बना दिया। फिर जाकर मालिक राजकुमार को बताया की घर बन कर तैयार हो गया है, जैसे ही यह बात मालिक को बताई तो राजकुमार ने कहा जाओ उसघर को तुम को दान में दिया। मालिक की यह बात सुनकर रामदेव बहुत खुश हुआ और मन ही मन सोच काश इस घर को हम बहुत अच्छी तरह से बनाये होते तो आज यह मकान भी अच्छा होता जैसा की सब मकान अच्छे बने हुए है मालिक के , और अब यह घर भी हमारा है।

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