Teen Bahuwo Ki Kahani in Hindi

Teen Bahuwo Ki Kahani in Hindi

तीन बहुएं-हिंदी कहानी

एक गांव में सरला नाम की एक औरत रहती थी जिसके तीन बहू थी एक दिन सरला अपनी तीनो बहुओं को अपने कमरे में बुलाती है सरला की तीनो बहुओं उसके कमरे में आ जाती हैं और कहती हैं मां जी आपने हमको बुलाया, सरला कहती है इस रविवार को हमें चंपा मौसी के लड़के के शादी में जाना है तुम सब पहली बार वहां जा रही हो इसलिए मैंने सोचा कि तुम सबको अपने कुछ गहने दे दूं शादी में पहनने के लिए ,यह बात सुनकर उनमें से एक बहू बोली मां जी आपके पास बहुत सारे गहने हैं सरला कहती हो यह सब तो तुम लोग ही पहनो मेरी बूढ़ी गर्दन पर तो यह सब अच्छे नहीं लगेंगे यह लो बहू यह गहने तो तुम तीनों के लिए है तीनो बहू अपना-अपना डिब्बा खोलते हैं तो उनके डिब्बों में अच्छे-अच्छे हार रखे मिलते हैं तुम्हें देखकर वह तीनों खुश हो जाती हैं इस पर तीसरी बहू बोल पड़ती है…

यह तो बहुत अच्छे हैं आपका बहुत-बहुत धन्यवाद , रीता कहती है कि आप तुम लोग जाओ इनको अच्छे से संभाल कर रखना और वह तीनों वह गहने लेकर अपने अपने कमरे में चली जाती है दूसरी बहू की नजर एक दूसरे डिब्बे पर पड़ती है जो कि सब डिब्बा से अलग रखा हुआ है और वह पूछती है सासु मां उस डिब्बे में क्या है सरला उस डिब्बे को देखकर कहती है वह हार मुझे मेरी सासू मा ने दिया था आप की सासू मां ने तब तो बहुत कीमती होगा हां है तो रुको मैं दिखाती हूं सरला अपने साथ द्वारा दिए गए डिब्बे को खोलती है तो उसे देखकर सरला की बहुओं की नजर उस डिब्बे से हटती ही नहीं है उन्हें अपने हाथ में पकड़े हुए हाथ उस हार के सामने फीके हुए लगने लगते हैं और वह सब कहने लगती हैं यह कितना सुंदर हार है इसका साइज तो देखो कितना बड़ा है जो इसे एक बार पहन ले उस पर से तो किसी की नजर हटे ही ना, सरला डिब्बा बंद करके रख देती है और तीनो बहुओं वहां से चली जाती हैं सर तीनों के मन से उस हार की तस्वीर नहीं हट रही वह अपने कमरे में उसी हार के बारे में सोच रही होती है काश मुझे वाह हार मिल जाए पहनने के लिए शादी में तो वहां के लोग मुझे ही देखेंगे, मेरी दोनों देवरानी तो देखती ही रह जाएंगी ,मैं तो अपनी तीनों जेठानी ओं से बहुत सुंदर हूं अगर वह हार शादी में पहने को मिल जाए तो कितना अच्छा होता….

तीनों बहुएं उस हार को पहनने के लिए सपने देखने लगती है पर समस्या यह थी कि उस हार को अपने सास से कैसे मांगा जाए सभी बहुएं यह सोचने लगी कि यदि मैं अपने सासू मां को खुश कर लूं तो वह हार मुझे दे देंगी ,कोई यह सोचती की मैं अपनी सासू मां के लिए अच्छे-अच्छे पकवान बनाऊंगी उससे वह खुश हो जाएगी तो मैं उनसे वह हार मांग लूंगी अगले दिन सरला जब अपने कमरे से बाहर आती है तो वह देखती है कि घर बहुत ज्यादा साफ हुआ है हर चीज व्यवस्थित जगह रखी हुई है और कोने कोने की सफाई हुई है अरे वाह घर की थी सफाई बहुत अच्छा लग रहा है घर तभी एक बहू आकर बोलती है मम्मी जी मैंने ही सफाई की है घर की सुबह जल्दी उठ गई थी और पूजा करी यह लीजिए मम्मी जी आरती , सरला अपनी तीसरी बहुत से खुश हो जाती है तभी तीसरी बहू दवाई लेकर आती है कहती है जी यह लीजिए आपके सुबह की दवाई आपको खाली पेट खाना होता है ना अरे हां यह तो मैं भूल ही जाती हूं रोज आप चिंता मत कीजिए आज से मैं आपका पूरा ख्याल रखूंगी अब आज से आप को दवाई खिलाने की जिम्मेदारी हमारी सरला दवाई देकर कुछ देर बाद नाश्ते के लिए टेबल पर बैठती है तो वह देखती है उसके मनपसंद का खाना उसकी टेबल पर लगा हुआ है कुछ खाने को देखकर सरला कहती है….

Teen Bahuwo Ki Kahani in Hindi

अरे वाह कितने दिन हो गए अच्छा खाना हुए तभी दूसरी बहू बोल पड़ती है या सब मैंने बनाया है सासू मां मुझे पता है आपको क्या पसंद है तीनो बहु खाने के टेबल पर बैठकर यही सोच रही होती है यह सब जो भी हो रहा है वह सब हार की वजह से हो रहा है घर की सफाई हो रही है मां के पसंद का खाना बनाया जा रहा है सब हार के लिए कोई बात नहीं जीत तो मेरी होगी वह हार तो मुझे ही मिलेगा पहली बहू अपने सास को पानी देती है मां जी लीजिए पानी पी लीजिए नहीं तो खाना गले बैठ जाए , सरला यह सब देख कर बहुत खुश हो जाती है और कहती है कि मैं कितनी किस्मत वाली हूं मुझे इतनी अच्छी बहूए मिली है मेरी कितनी सेवा कर रही हैं और मेरे घर का कितना अच्छा ख्याल रख रही हैं यह सुनकर तीनों बहुएं मुस्कुराने लगती है और दिन भर अपने सास को खुश करने में लगी रहती है ….

1 दिन सरला को मार्केट जाना होता है और उनके साथ जाने के लिए तीनों बहुए आपस में लड़ने लगती हैं यह सब सुनकर तीनों आपस में कहती हैं मैं जानती हूं कि इतनी सेवा क्यों करी जा रही है वह पुश्तैनी हार पाने के लिए ना और यह कह कर आपस में लड़ने लगती है वह तीनों आपस में लड़ रही होती है सरला समझ जाती है कि यह सब सेवा हार के लिए हो रही थी और वह कहती है कि तुम तीनों बहुएं मेरी इतनी सेवा सिर्फ उस हार के लिए कर रही थी मतलब यह सब दिखावा था यह सुनकर तीनों बहुएं चुप हो जाती है वह सब अपनी अपनी सफाई देने लगती है लेकिन सरला गुस्से में हो कर कहती है मैंने सब सुन लिया तुम लोगों की बातें यह करते हुए तुम लोगों को शर्म तक नहीं हुई सरला की गुस्से भरी बातें सुनकर तीनो बहुओं अपनी सासू मां से माफी मांग लगती हैं और कहती हैं हमें माफ कर दो सासू मां आगे से हम तीनों उस हार के बारे में बात नहीं करेंगे ना ही उसे पाने की कोशिश करेंगे सरला गुस्सा होकर वहां से चली जाती है कुछ दिनों बाद शादी में जाने के लिए वह दिन आता है तीनो बहु में तैयार हो जाती हैं और उन्होंने अपनी सासू मां के द्वारा दिया हुआ हार पहनती हैं तभी सरला भी वहां आ जाती है सरला ने वही अपना पुश्तैनी हार पहना हुआ होता है तीनो बहु हुए सरला को देख कर चौक जाती है सरला अपनी बहू से पूछती है कि कैसा लग रहा है मेरा हार और तीनों बहुएं सरला की तरफ देख कर चुप हो जाते हैं.

 

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